हिमाचल प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
हिमाचल (Himachal Pradesh) की भौगौलिक स्थिति
- हिमाचल प्रदेश को आप पश्चिमी हिमालय भी कह सकते है जो 55,673 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है |
- प्रदेश का उत्तरी पूर्वी भाग हिमाच्छादित ,रुपहले पर्वत शिखरों , प्राकृतिक दृश्यों से सुसज्जित है |
- यह एक पहाडी प्रदेह है और राज्य का अधिकतर हिस्सा धौलाधार पहाडियों की तलहटी में बसा हुआ है |
- 6,816 मीटर की ऊँचाई पर स्थित रिवो फर्ग्याल हिमाचल प्रदेश की सबसे ऊँची चोटी है |
- बर्फ पिघलकर बहने से राज्य की चिनाब ,रावी ,व्यास ,सतलज और यमुना नदी वर्ष भर बहती रहती है |
- शिवालय ,जास्कर एवं महाहिमालय पर्वतों की चोटिया है |
- हिमाचल प्रदेश में शिल्ला (7026 मी.) , रिवो फ्र्ग्याल ,चुडधार एवं देवबिट्टा प्रमुख शिखर है |
- राज्य में बारालाचा ला , पीन पार्वती ,चुआरी और चम्बा-कांगड़ा मुख्य दर्रे है |
- राज्य के उत्तर में जम्मू-कश्मीर और दक्षिण पूर्व में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र है |
- दक्षिण और पश्चिम में यह राज्य हरियाणा और पंजाब से जुडा है |
- हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh ) के पूर्व में तिब्बत (Tibet )की सीमा है |
- हिमाचल में उप-उष्णकटिबंधीय किस्म की वनस्पतिया पायी जाती है |
- यहाँ गर्मी की ऋतू सुहावनी एवं सर्दी की ऋतू में अधिक ठंड पडती है और भारी बर्फ गिरती है |
- यहा धमर्शाला में मूसलाधार बारिश होती है तो लाहुल-स्पीती में लगभग वर्षारहित रहते है |
- राज्य में शिमला और सिरमौर जिलो की उपजाऊ भूमि है बाकि जिलो में जंगल और पहाडी भूमि है |
- हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh ) में वर्षा का औसत 181.6 है |
वनस्पति और जीव
- हिमाचल (Himachal Pradesh ) के 66.52 प्रतिशत हिस्से पर जंगल है |
- हिमाचल में औषधीय और सुगंधित पौधों की प्रचुरता है |
- हिमाचल प्रदेश को “फलो का कटोरा ” कहा जाता है क्योंकि यहा फलो के बगीचों की भरमार है |
- राज्य सरकार अब हिमाचल प्रदेश को विश्व में Flower Basket बनाने की तैयारी में है |
- हिमाचल की खडी ढलान पर अनेको मैदानी और चराई क्षेत्र है |
- हिमाचल प्रदेश में 463 पक्षियों , 77 स्तनधारी जीवो , 44 सांपो और 80 मछलियों की प्रजातिया है |
- ग्रेट हिमालयन पार्क को यूनेस्को ने World Heritage Site में शामिल कर लिया है |
- ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क और पिन वैली नेशनल पार्के सहित 30 वन्यजीव अभयारण्य और 3 संरक्षण स्थल है |
हिमाचल (Himachal Pradesh) की आर्थिक स्थिति
- हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि और चरागाहो पर आश्रित है |
- हिमाचल में शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद में 45 प्रतिशत कृषि का योगदान है |
- हिमाचल के 93 प्रतिशत लोग सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है
- हिमाचल में गेहू ,मक्का ,धान ,चावल , अदरक ,गलगल ,चिलगोजा एवं सब्जियों की पैदावार होती है |
- बागवानी के तहत सेब,नाशपाती ,आडू ,बेर ,नीम्बू,लीची ,अमरुद और झरबेरी का उत्पादन होता है |
- हिमाचल में सबसे ज्यादा धन कमाने वाली फसल सेब की खेती है |
- फलो की खेती की जाने वाली भूमि में से अकेले सेब की खेती 49 प्रतिशत भूमि पर होती है |
- फलो के कुल उत्पादन में अकेले सेब का प्रतिशत 85 प्रतिशत है
- सेब से राज्य को लगभग 3500 करोड़ की इकोनोमी मिलती हाउ |
- हिमाचल से सेब ना केवल भारत के अन्य राज्यों बल्कि विदेशो में भी निर्यात होते है |
- पनबिजली (Hydropower) भी राज्य का अन्य आय का महत्वपूर्ण स्त्रोत है |
- इससे राज्य की पनबिजली क्षमता पांच नदी घाटियों से 27,436 MW है |
- यहा से पंबिजली उत्पादन प्रतिवर्ष 8,418 MW होता है |
- प्रदेश के औधोगिक क्षेत्र के तहत लगभग 350 फैक्ट्रीयो से करीब 60 हजार व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त है |
- यहा कृषि और बागवानी के अतिरिक्त औषधि ,रेशम ,इलेक्ट्रॉनिक एवं कलपुर्जो के उद्योग है |
- राज्य में प्रमुख खनिज नमक ,स्लेट,जिप्सम ,चुना पत्थर ,बेराईट ,डोलोमाईट और पायराइट है |
- इस तरह देखा जाए टी यहा की कुल GDP लगभग 254 बिलियन रूपये है |
हिमाचल प्रदेश में परिवहन
- प्रदेश में सडको की कुल लम्बाई 28,208 किमी है जिसमे राष्ट्रीय राजमार्ग 1234 किमी है |
- हिमाचल में 8 राष्ट्रीय राजमार्ग और 19 प्रदेश राजमार्ग है |
- हिमाचल की कुछ सडके सर्दियों में बर्फ की वजह से और मानसून में भूस्खलन की वजह से बंद रहती है |
- सडक घनत्व के मामल में हमीरपुर का नाम सबसे पहले आता है |
- हिमाचल में रेलमार्ग की कुल लम्बाई 259 किमी है जिसमे से 23 किमी ब्रॉडगेज और 246 किमी नैरोगेज है |
- पठानकोट से जोगिन्दरनगर मीटर गेज और कालका से शिमला नैरोगेज लाइने है |
- कालका-शिमला रेल लाइन (Kalka-Shimla Raliway) को वर्ष 2008 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया |
- हिमाचल में तीन घरेलू हवाई अड्डे भुंतर (कुल्लू) , गग्गल (कांगड़ा) और शिमला एअरपोर्ट है
हिमाचल प्रदेश की संस्कृति
- हिमाचल प्रदेश भारत के अन्य प्रदेशो की तरह बहुसंस्कृति और बहुभाषी प्रदेश है |
- यहा बोले जाने वाली मुख्य भाषा हिंदी,पंजाबी,पहाडी,डोंगरी,मंडली,कांगड़ी और किनौरी है |
- हिंदू समुदाय में यहा पर ब्राह्मण ,राजपूत ,कन्नेत ,राठी और कोली है |
- आदिवासी जनजातियो में यहा गाडिस ,किन्नर,गुज्जर,पंगवाल और लहौली है |
- हिमाचल अपने हथकरघा उद्योग के लिए भी प्रसिद्ध है |
- हिमाचल की पश्मीना शाल की मांग तो पुरे देश में है |
- यहा के लोगो का त्योहारों में विशेष लगाव है और इनमे बढ़ चढकर भाग लेते है |
- यहा त्योहारों में पोरी,लोहड़ी,होली,कुल्लू दशहरा,बसाओ,गोगानवमी ,लोसर ,राखी और दिवाली मुख्य है |
हिमाचल के पर्यटन स्थल
शिमला में पर्यटन स्थल
- जाखू हिल – यह शिमला की सबसे ऊँची चोटी है | यह आसमान छुते देवदारों और कूदते फांदते बंदरो के लिए प्रसिद्ध है |
- कुफरी– यह सुंदर स्थल बर्फ के खेलो ,याक की सवारी तथा कस्तुरी मृग प्रजनन केंद्र के लिए प्रसिद्ध है | सर्दियों में यहा बर्फ पर स्कींग का आनन्द लिया जा सकता है |
- प्रोस्पेक्ट हिल-इस खुबसुरत पहाडी से आसपास के दृश्यों को कैमरे में कैद किया जा सकता है |
- चाडविक फॉल – यह जल प्रपात बड़ी उंचाई से आवाज करता हुआ गिरता है यह एक लोकप्रिय स्थल है |
- वाइसरीगल लाज – यह शिमला का सुंदर भवन है जो अंग्रेजो के जमाने की याद दिलाता है | इस भवन में एतेहासिक वस्तुओ का संग्रह किया गया है |
डलहौजी में पर्यटन स्थल
धौलाधर शृंखलाओं की पांच पहाडियों -पैत्रिन,बकरोटा , बलून,कठलोग एवं टीहरा से घिरा गगनचुंबी देवदार बलूत एवं चीड के वृक्षों से शोभायमान डलहौजी देश का खबसूरत और एतेहासिक स्थल है | अंग्रेजो को यहाँ की आबोहवा इतनी पसंद आयी कि उन्होंने यहा कई सैरगाह विकसित किये
- जन्दरी घाट– यहा पाइन वृक्षों के मध्य पूर्व चम्बा राज्य के शासको के महल दर्शनीय है | यह पिकनिक के लिए खुबसुरत स्थल है |
- कालाटोप-देवदार के काले घने जंगलो से घिरा कालाटोप एक खुबसुरत सैरगाह है | यह वन्य प्राणियों की शरण स्थली भी है |
- डायना कुंड– यहा हर मौसम में सैलानियों की आवाजाही रहती है | यह इतनी उंचाई पर स्तिथ है कि यहा से रावी ,व्यास और चिनाब नही बहती है |
- पंजपुला-यहा पर भगतसिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह की समाधि है | यहा पांच छोटी छोटी पुलियाओ के नीचे से बहती जलधाराओ का दृश्य अलौकिक लगता है |
कुल्लू मनाली
कुल्लू और मनाली दोनों पास पास है | हर नवयुगल का सपना रहता है कि यहा की सैर करे | हर साल यहा लाखो पर्यटक सैर का लुत्फ़ उठाते है |
- रायसेन– यहा व्यास नदी के किनारे 14 हट्स है | यह स्थान बगीचों से घिरा हुआ है |
- बंजार -यह सरकारी विश्रामगृह है |
- बठाड– यह रमणीक स्थल आखेट और शिकार के लिए प्रसिद्ध है |
- नग्गर– यहा पर त्रिपुरा सुन्दरी का मन्दिर एवं रोरिक कलादीर्घा कलाप्रेमियो के आकर्षण का केंद्र है |
- मणिकर्ण गुरुद्वारा-यहा विशाल गुरुद्वारा है | पार्वती नदी यहा वेग से बहती है | पुल पारकर रामकुंड या सीताकुंड के गर्म सरोवर से स्नान किया जाता है | इसके अलावा लारजी , बिजली महादेव ,कटरई ,बाबेली अन्य दर्शनीय स्थल है |
- सोलंग वैली – यहा पैराग्लाइडिंग एवं आइस स्केटिंग का मजा लिया जा सकता है | बच्चो के लिए घुड़सवारी की भी व्यवस्था है |
- रोहतांग दर्रा-मनाली से 51 किमी दूर स्तिथ यह काफी लोकप्रिय पर्यटन स्थल है | चारो तरफ फ़ैली बर्फ को देखने सैलानी मन्त्र्मुघ हो जाते है |
- हिडिम्बा मन्दिर– पैगोडा शैली से इस मन्दिर में लकड़ी की सुंदर नक्काशी की हुयी है | इसके चारो ओर विशाल चट्टाने बिखरी हुयी है | इसके अलावा अन्य दर्शनीय स्थलों में वशिष्ट मन्दिर ,रहाला फाल और कोठी है |
सोलन के प्रमुख दर्शनीय स्थल
- कसौली– कसौली गर्मियों में अपने चारो ओर फैले चीड़ और देवदार के घने वृक्षों से एवं सर्दियों में बर्फ की चादर ओढकर पर्यटकों को मन्त्रमुग्ध कर देती है |
- सनावर-अंग्रेजो ने इस शहर को बसाया था | उनकी स्मृति में एक स्मारक भी बनाया गया है | यह सौर उर्जा चलित स्वीमिंग पुल के लिए प्रसिद्ध है |
- छैल– उज जगह पैलेस होटल ,विश्व के सबसे ऊँचे क्रिकेट मैदान तथा आर्मी पब्लिक स्कूल के लिए प्रसिद्ध है |
हिमाचल प्रदेश में हरे भरे पहाड़ो एवं प्राकृतिक दृश्यों के भरमार है | इनके अलावा यहा पटनीटॉप ,लाहौल स्पीती ,धर्मशाला आदि दर्शनीय स्थल है |