हिमाचल प्रदेश के प्रमुख दर्रे,घाटियां और जोत

 

 

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख दर्रेरोहतांग दर्राबारालाचा दर्राकुंजम दर्रा,  (Passes of Himachal Pradesh in Hindi, Rohtang Pass, Baralacha Pass, Kunzum Pass) 

हिमाचल प्रदेश को प्रकृति ने अनेक उपहार दिए है जिनमे से एक दर्रे भी है दो पहाड़ों के बीच से निकले वाला राश्ते को दर्रे कहते है तो आज हम प्रतियोगी परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण दर्रे के बारे में बात करेगे। 

 

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख दर्रे

 

दर्रे के नाम 

उँचाई (मीटर में)

सबधित जिले 

तैंतु दर्रा 

5,000 

कुल्लू से काँगड़ा 

कुगती दर्रा 

4,961 

लाहौल से भरमौर 

छोबिया दर्रा  

4,934 

लाहौल से भरमौर 

दराटी दर्रा 

4,720 

चम्बा से पांगी 

तमसर दर्रा 

4,572 

काँगड़ा 

कुंजम दर्रा 

4520 

लाहौल से स्पीति 

बारालाचा दर्रा 

4551 

लाहौल से स्पीति 

शिपकीला दर्रा 

4500 

लाहौल से स्पीति 

साच दर्रा 

4395 

चम्बा से पांगी

हमटा दर्रा 

4336 

कुल्लू से स्पीति 

रोहतांग दर्रा 

3798 

कुल्लू  से लाहौल 

चन्द्रखेरनी दर्रा 

3600 

कुल्लू 

जालसू दर्रा 

3450 

काँगड़ा से चम्बा 

जालोरी दर्रा 

3135 

कुल्लू (सिराज)

दुल्ची दर्रा 

2788 

मण्डी से कुल्लू 

बसोदन दर्रा  

2400 

चम्बा से भटियात 

कालिछो दर्रा  

4729 

लाहौल से भरमौर 

निकोड़ा  दर्रा 

4750 

काँगड़ा से भरमौर 

इन्द्राहर दर्रा 

4320 

काँगड़ा से भरमौर 

पादरी दर्रा 

3050 

चम्बा से जम्मू 

भीम घसूतड़ी 

5440 

काँगड़ा से चम्बा 

लालुनी जोत 

5440 

लाहौल-स्पीति 

मकोड़ी जोत 

5190 

काँगड़ा 

दुग्गी जोत 

5060 

भरमौर से लाहौल 

गुलारी जोत 

4960 

लाहौल 

 

रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass)

 रोहतांग दर्रे को रोहतांग पास के नाम से भी जाना जाता है रोहतांग दर्रा कुल्लू से लाहौल तक स्थित है यह दर्रा समुद्रतल से 3978 मीटर (13050 फुट)  की उचाई पर स्थित है मनाली और लेह को जोड़ने वाली सड़क रोहतांग दर्रे से होकर गुजरती है रोहतांग दर्रा हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध दर्रे में से एक माना जाता है रोहतांग दर्रे पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति विलियम मूरक्राफ्ट थे। 

कुंजम दर्रा (Kunzum Pass)

कुंजुम दर्रे को कुंजुम ला दर्रा के नाम से भी जाना जाता है कुंजुम दर्रा 4,520 मीटर (14,913 फुट) की उँचाई पर लाहौल स्पीति में स्थित है कुंजम दर्रा लाहौल और स्पीति को जोड़ने वाला सबसे उँचा पहाड़ी दर्रा है। 

बारालाचा दर्रा (Baralacha Pass)

बारालाचा का अर्थ है- शिखर पर चौराहा बारालाचा दर्रे को बारालाचा ला नाम से भी जाना जाता है बारालाचा दर्रा समुद्रतल से 4,551 मीटर (14,000फुट) की उँचाई पर स्थित है बारालाचा दर्रा लाहौल और लद्दाख को आपस में जोड़ता है जास्करलद्दाखस्पीति और लाहौल की सड़के बारालाचा दर्रे के पास मिलती है इसलिए बारालाचा दर्रे को चौराहे को मिलाने वाला दर्रा कहते है और चिनाब नदी भी बारालाचा दर्रे के पास से निकलती है। 

शिपकीला दर्रा (Shipki La Pass)

शिपकी ला दर्रे को शिपकी दर्रे के नाम से भी जाना जाता है शिपकीला दर्रा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले को तिब्बत के जान्दा जिले से जोड़ता है यह दर्रा समुद्रतल से 4500 मीटर की उँचाई पर स्थित है सतलुज नदी शिपकीला दर्रे के पास से होकर भारत में प्रवेश करती है   

इन्द्राहर दर्रा (Indrahar Pass) 

इन्द्राहर दर्रा काँगड़ा से भरमौर तक समुद्रतल से 4342 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यह दर्रा धौलाधार श्रेणी में स्थित है यह पर अप्रैल से अक्टूबर के बीच में ट्रैकिंग के दौरान लोगो को बहुत आकर्षित करता है। 

साच दर्रा (Saach Pass)

साच दर्रा हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में स्थित है समुद्रतल से इस दर्रे की ऊचाई 4395 मीटर है यह दर्रा पीर पंजाल शृंख्ला में स्थित है साच दर्रा चम्बा घाटी को पांगी घाटी से जोड़ता है।   

हमटा दर्रा (Hamta Pass)  

हमटा दर्रा कुल्लू को लाहौल से जोड़ता है और इस दर्रे की समुद्रतल से उचाई 4336 मीटर है और यह दर्रा पीर पंजाल श्रेणी में आता है। 

जालोरी दर्रा (Jalori Pass) 

जालोरी दर्रा कुल्लू जिले में स्थित है जो समुद्रतल से 3135 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 

पिन पार्वती दर्रा (Pin Parbati Pass)

पिन पार्वती दर्रा हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और लाहौल स्पीति जिले के बीच स्थित है और इस दर्रे की समुद्रतल से ऊंचाई 5319 मीटर है। 

हिमाचल प्रदेश की प्रमुख घाटियां

हिमाचल प्रदेश की प्रमुख घाटियांसांगला या बस्पा घाटीइमला-विमला घाटीकाँगड़ा घाटीकुल्लू घाटीक्यारदा दून घाटी 

हिमाचल प्रदेश में घूमने के लिए मंदिरझीलें बहुत से प्रमुख स्थान है लेकिन हजारों फ़ीट की उचाई पर स्थित हिमाचल प्रदेश की घाटियाँ चार चाँद लगा देती है तो आज हम उन प्रमुख घाटियों के बारे में बताएगे जिनके बारे में हिमाचल प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते है।

 

घाटियों के नाम 

जिलों के नाम 

चम्बा घाटी 

चम्बा 

काँगड़ा घाटी 

काँगड़ा 

बल्ह घाटी 

मण्डी 

चुराह घाटी 

मण्डी 

लाहौल घाटी 

लाहौल स्पीति 

पब्बर घाटी 

शिमला 

क्यारदा दून घाटी

सिरमौर 

सांगला या बस्पा घाटी

किन्नौर 

कुनिहार घाटी 

सोलन 

 

 

काँगड़ा घाटी शाहपुर से लेकर पालमपुर तक फ़ैली है काँगड़ा घाटी के प्रसिद्ध शहर पालमपुर,नूरपुरकाँगड़ाबैजनाथ धर्मशाला है  काँगड़ा घाटी बीर बिलिंग हैंग ग्लाइडिंग का प्रसिद्ध स्थान है काँगड़ा घाटी को वीर भूमि के नाम से भी जाना जाता है  इस घाटी के किसी भी कोने से सफेद बर्फ से ढकी धौलाधर पर्वत श्रखला दिखाई पड़ती है काँगड़ा घाटी पश्चिम से पूर्व की और बढ़ती है शाहपुर से पालमपुर तक ऊपर उठती है इस घाटी में काँगड़ा चित्रकला भी बहुत प्रसिद्ध है। 

सांगला या बस्पा घाटी (Sangla and Baspa)

सांगला घाटी किन्नौर जिले की प्रसिद्ध घाटी है इस घाटी का उद्गम बस्पा नदी से होता है सांगला घाटी समुद्रतल से 1830 से 3475 मीटर के बीच उँचाई पर स्थित है सांगला घाटी पर स्थित देश का आखिरी और सबसे उँचा गाँव छितकुल भी स्थित है कामरू’  सांगला’ बस्पा घाटी के प्रमुख गाँव है प्रसिद्ध चुग शकागो दर्रा बस्पा घाटी में स्थित है सांगला घाटी को बस्पा घाटी के नाम से भी जाना जाता है इसके अलावा किन्नौर जिले में हंग-रंग घाटी रोपा घाटी अन्य प्रसिद्ध घाटियाँ स्थित है सांगला घाटी सबसे अधिक सुगन्धित घाटी है।       

कुल्लू घाटी (Kullu Valley)

कुल्लू घाटी को देवी देवताओँ की घाटी भी कहाँ जाता है इस घाटी में पाए जाने वाले देवदार और सेब के वृक्ष कुल्लू घाटी सुन्दरता को बढ़ाते है कुल्लू घाटी की लम्बाई 75 किलोमीटर और चौड़ाई से लेकर किलोमीटर है कुल्लू घाटी समुद्रतल से 1200 मीटर की उँचाई पर स्थित है कुल्लू की रूपी घाटी चांदी की खानों के लिए बहुत प्रसिद्ध है और इस घाटी में जड़ी बूटियाँ भी पाई जाती है कुल्लू घाटी के मुख्य शहर कुल्लूमनालीआनीनग्गरबंजारभुंतर आदि है।     

बल्ह घाटी (Balh Valley)

बल्ह घाटी मण्डी जिले में स्थित समुद्रतल से 800 मीटर की ऊंचाई पर मैदानी भागों में स्थित है बल्ह घाटी सुंदरनगर घाटी के नाम से भी प्रसिद्ध है बल्ह घाटी के उत्तर में गुटकेर से लेकर पश्चिम में सुंदरनगर तक फैली है साकेती नाला बल्ह घाटी के बीचों बीच बहता है वर्ष 1962 से भारतीय जर्मन संयुक्त कृषि परियोजना बल्ह घाटी में चलाई जा रही है जिससे इस परियोजना के तहत मिश्रित खेती पर बल दिया गया है भू-सरक्षण और खाद बनाना इस परियोजना के अंग थे मण्डी जिले में बल्ह घाटी के अलावा देमी घाटी भी प्रसिद्ध है देमी घाटी 10 किलोमीटर लंबी और किलोमीटर चौड़ी है देमी घाटी की मिट्टी अधिक उपजाऊ है इस घाटी में जौगेहूं,अदरकअनेक प्रकार की फसल उगाई जाती है। 

चम्बा घाटी (Chamba Valley)

चम्बा घाटी रावी घाटी के नाम से भी प्रसिद्ध है चम्बा घाटी के बीचो बीच रावी नदी बहती है चम्बाभरमौरखजियारडलहौजीचम्बा घाटी के प्रमुख स्थान है चम्बा घाटी में ज्यादातर गददी जनजाति के लोग रहते है चम्बा घाटी के लोगो को चम्ब्याल नाम से भी बुलाया जाता है खजियार चम्बा घाटी का प्रसिद्ध पयटक स्थल है जिसे मिनी स्विट्ज़रलैंड के नाम से जाना जाता है चम्बा घाटी अलावा चम्बा जिले में बदलभैरवपांगीसूरल आदि घाटियाँ स्थित है  चम्बा घाटी में पीपल और शीशम के पेड़ पाए जाते है।         

लाहौल स्पीति घाटी (Lahaul Spiti Valley)

लाहौल घाटी हिमाचल प्रदेश की सबसे अधिक ऊंचाई पर पाई जाने वाली घाटी है समुद्रतल से लाहौल घाटी की ऊंचाई 3000 मीटर से 6500 मीटर तक है यह घाटी जांस्कर और बृहद हिमालय के बीच में स्थित है लाहौल घाटी में मुख्यतः आलू की फसल उगाई जाती है और इस घाटी में अल्पाइन वृक्ष पाये जाते है लाहौल घाटी से चन्द्रा और भागा नदियोँ का उदगम भी होता है लाहौल की भागा घाटी को रंगोली घाटी भी कहते है इस घाटी के अलावा लाहौल में गारा घाटी भी स्थित है जिसे चन्द्रा घाटी भी कहते है।   

पौटा घाटी (Paonta Valley)

पौंटा घाटी सिरमौर जिले में स्थित क्यारदा दून घाटी के नाम से प्रसिद्ध है यमुना नदी पौंटा घाटी को देहरादून घाटी से अलग करती है पौंटा घाटी की मुख्य नदियाँ गिरी’ और बांटा’ है कियारदा दून घाटी में लोगो को राजा शमसेर प्रकाश ने बसाया था एक समय ऐसा था जब यहाँ कोई भी नहीं रहता था यह पर जंगल ही जंगल थे कियारदा दून घाटी के प्रमुख कस्बे माजराधौलाकुआँपौंटा साहिब है। 

सरसा घाटी (Sarsa Valley)

सरसा घाटी सोलन जिले में स्थित नालागड़ से लेकर कालका तक फैली हुई है इस घाटी को औद्योगिक घाटी भी कहा जाता है कालका की शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बल्द नदी सरसा नदी का निर्माण करती है सरसा घाटी के औद्योगिक शहर नालागड़बददीपरमाणु है इस घाटी के प्रमुख शहर कसौलीसनावरहरिपुररामशहर है। 

गम्भर घाटी (Gambhar Valley)

गम्भर घाटी सोलन जिले को दो भागो में बाँटती है गम्भर घाटी शड़ी’ नामक स्थान से सोलन जिले में प्रवेश करने के बाद बिलासपुर जिले में प्रवेश करती है गम्भर घाटी में स्थित अर्की’ बाघल रियासत की राजधानी थी गम्भर घाटी के प्रमुख स्थल कुठारबनलगीजगजोतमहलोगघड़सी आदि है।  

अशवनी घाटी (Ashwani Valley)

अशवनी घाटी शिमला से लेकर सोलन तक फैली हुई है अशवनी घाटी दायी ओर बघाटी और बायीं ओर क्योंथली भाषा बोली जाती है इस घाटी के प्रमुख शहर शिमलाचायलसोलनकण्डाघाटतथा धर्मपुर है। 

पब्बर घाटी (Pabbar Valley)       

पब्बर घाटी शिमला जिले की रोहडू तहसील में स्थित है इसलिए पब्बर घाटी को रोहडू घाटी के नाम से भी जाना जाता है पब्बर घाटी के पानी की कमी को पब्बर नदी पूरा करती है पब्बर नदी का उदगम चांसल चोटी से होता है पब्बर घाटी हाटकोटी मंदिर से शुरू होकर टिकरी नामक स्थान पर खत्म होती है इस घाटी की उँचाई 1500 से 5000 मीटर तक है पब्बर घाटी में छोटी छोटी घाटियाँ भी है जहाँ पर खेती की जाती है।   

सतलुज घाटी (Satluj Valley)

सतलुज घाटी किन्नौर जिले के शिपकी नामक स्थान से लेकर बिलासपुर जिले तक फैली हुई है सतलुज घाटी जास्करबृहद हिमालयधौलाधार पर्वत श्रृंखला को काटती हुई पंजाब के मैदानी इलाके में प्रवेश करती है रामपुर और बिलासपुर इस घाटी के किनारे बसे प्रमुख नगर है। 

चौतरा घाटी (Chauntra Valley)

चौतरा घाटी मण्डी जिले की जोगिन्दर नगर तहसील में स्थित है यह घाटी धौलाधार पर्वत श्रृंखला के नीचे वाले भाग में स्थित है। 

इमला-विमला घाटी (Emla-Vimla Valley)

इमला-विमला घाटी मण्डी जिले के शिकारीधार से परलोग के बीच में स्थित है इमला विमला दो अलग अलग जल धाराएँ है इस घाटी के उत्तर पूर्व में शिकारी धाररायग़ढ़ गुहाड़,बगड़ा जैसे इलाके स्थित है तथा चिण्डीबखरौट आदि इलाके स्थित है करसोग भी इस घाटी में स्थित है।

चुराह घाटी (Churah Valley)

चम्बा जिले में स्थित बैरा और स्यूल नदियाँ चुराह घाटी का निर्माण करती है अप्पर चुराह घाटी में महलवा और दराटी की जोत है जिन्हे पारकर के हम लाहौल स्पीति में पहुंचते है और तीसा के उत्तर में अड़ाऊ और चैहनी की जोत है जिसे पारकर के हम प्रसिद्ध चामुण्डा मंदिर पहुँचते है चुराह घाटी लगभग 35 प्रतिशत वनों से ढ़की हुई है तिस्सा और सलूणी इसी घाटी में स्थित है। 

कुनिहार घाटी (Kunihar Valley)

कुनिहार घाटी कुणी खड़्ड से शुरू होकर तकुरदिया तक फैली है और सोलन जिले में स्थित यह घाटी समुद्रतल से 100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है इसके अलावा सोलन जिले में सप्रून घाटी भी स्थित है। 

दावी घाटी (Davi Valley)

दावी घाटी बिलासपुर जिले में स्थित बांदला धार और बहादुरपुर धार के बीच में स्थित है।